जम्मू-कश्मीर सरकार ने खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में व्यापक सुधारों की तैयारी शुरू की है। सरकार की योजना खनिजों के आवंटन, खनन गतिविधियों की निगरानी, राजस्व वसूली और अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करने की है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, खनन क्षेत्र में करीब 20 अतिरिक्त सुधारों पर काम किया जा रहा है।
सुधारों का प्रमुख उद्देश्य खनन प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करना और अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना है। जम्मू-कश्मीर में खनिज ब्लॉकों की नीलामी के लिए इलेक्ट्रॉनिक नीलामी व्यवस्था को पहले ही अपनाया जा चुका है। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक नीलामी से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी।
खनिजों के परिवहन और अवैध खनन पर निगरानी के लिए तकनीकी साधनों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। एकीकृत खनन निगरानी व्यवस्था, रेडियो पहचान प्रणाली, जीपीएस आधारित निगरानी और मौके पर इलेक्ट्रॉनिक चालान जैसी व्यवस्थाएं अवैध खनन रोकने में मदद कर रही हैं।
सरकार पर्यावरणीय नियमों के पालन को भी डिजिटल निगरानी व्यवस्था से जोड़ना चाहती है। खनन क्षेत्रों की गतिविधियों की निगरानी बेहतर होने से नियमों के उल्लंघन की पहचान समय पर की जा सकेगी। इससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खनन गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के खनन विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित उपयोग को लेकर भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अप्रैल 2026 में खनन विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उपयोग के मामलों की पहचान और कार्ययोजना तैयार करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया था।
खनन क्षेत्र के डिजिटलीकरण से निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं आसान होने, राजस्व संग्रह मजबूत होने और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य खनिज संसाधनों का पारदर्शी और टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करते हुए जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत करना है।