जम्मू-कश्मीर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को वित्तीय मजबूती मिलने लगी है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में एमएसएमई इकाइयों को दिए जाने वाले ऋण वितरण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार और बैंकिंग संस्थानों का मानना है कि इससे स्थानीय उद्योगों, स्वरोजगार और नए उद्यमों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। आसान ऋण सुविधा, कम ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता, ऋण गारंटी योजनाएं और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से छोटे उद्यमियों के लिए पूंजी जुटाना पहले की तुलना में अधिक सरल हुआ है। इसका सीधा लाभ नए उद्योगों के साथ-साथ पहले से संचालित छोटे व्यवसायों को भी मिल रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में हस्तशिल्प, कालीन उद्योग, पश्मीना, सेब प्रसंस्करण, सूखे मेवे, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में एमएसएमई इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऋण उपलब्धता बढ़ने से इन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता, रोजगार के अवसर और निर्यात की संभावनाओं में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार, ऋण वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए डिजिटल आवेदन प्रणाली, ऑनलाइन स्वीकृति और समयबद्ध ऋण वितरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही उद्यमियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और वित्तीय परामर्श उपलब्ध कराने के लिए विशेष जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
प्रशासन का मानना है कि एमएसएमई क्षेत्र स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है। इसलिए नए उद्यम स्थापित करने, महिलाओं और युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन देने तथा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी गति से एमएसएमई क्षेत्र को वित्तीय सहायता मिलती रही, तो जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ेंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को भी महत्वपूर्ण गति मिलेगी।