भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उन क्षेत्रों में चीन द्वारा की जा रही गतिविधियों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिन्हें भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और ऐसे क्षेत्रों में चीन की किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि, आधारभूत ढांचे का विकास या अन्य परियोजनाएं भारत के दृष्टिकोण से अवैध हैं। भारत ने इस संबंध में चीन के समक्ष औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि इस प्रकार की गतिविधियां वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकतीं।
सरकार ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। इन क्षेत्रों से संबंधित किसी भी प्रकार की एकतरफा कार्रवाई भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीमा से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच स्थापित द्विपक्षीय समझौतों और कूटनीतिक वार्ताओं के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
भारत ने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी भी पक्ष द्वारा यथास्थिति बदलने का प्रयास क्षेत्रीय विश्वास और आपसी संबंधों को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने उम्मीद जताई कि चीन दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और संवाद की भावना का सम्मान करेगा।
विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भारत लगातार अपना स्पष्ट और सुसंगत रुख अपनाता रहा है। भारत का कहना है कि सीमा विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में उसका रुख पूरी तरह स्पष्ट और अडिग है।
इस घटनाक्रम के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष भी अपने आधिकारिक दृष्टिकोण को दोहराया है और कहा है कि देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता रहेगा।