जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों के दौरान 4,472 तपेदिक (टीबी) के मामलों की पहचान की गई है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने रोग की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार को लेकर जागरूकता अभियान को और तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि टीबी मुक्त जम्मू-कश्मीर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, विभिन्न जिलों में चलाए जा रहे स्क्रीनिंग कार्यक्रमों, सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों और घर-घर सर्वेक्षण के माध्यम से मरीजों की पहचान की जा रही है। विभाग ने बताया कि आधुनिक जांच सुविधाओं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण रोगियों का समय रहते पता लगाना संभव हो रहा है, जिससे उपचार की सफलता दर में भी सुधार हुआ है।
अधिकारियों ने कहा कि टीबी एक संक्रामक रोग है, लेकिन समय पर जांच और नियमित दवा सेवन से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच और उपचार की सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को टीबी के लक्षणों, बचाव के उपायों और उपचार के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। विभाग का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी से इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं और संक्रमण के प्रसार को भी रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे टीबी से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराकर उपचार शुरू करें।