कश्मीर घाटी में बढ़ते नशे और सामाजिक समस्याओं को लेकर कई धार्मिक संगठनों और उलेमाओं ने चिंता जताई है। विभिन्न धार्मिक मंचों से युवाओं को नशे, अपराध और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की अपील की गई। धार्मिक नेताओं का कहना है कि समाज को सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखने के लिए युवाओं की सही दिशा में भागीदारी बेहद जरूरी है।
श्रीनगर, अनंतनाग, बारामूला और पुलवामा समेत कई जिलों की मस्जिदों और धार्मिक सभाओं में इस विषय पर विशेष संदेश दिए गए। उलेमाओं ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, खेल और सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेने की सलाह दी। कई धार्मिक संगठनों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल और खराब संगति से भी युवा भटक रहे हैं, इसलिए अभिभावकों को भी बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है।
धार्मिक नेताओं ने लोगों से समाज में जागरूकता फैलाने और नशे के खिलाफ सामूहिक अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन सभी को मिलकर काम करना होगा। कुछ संगठनों ने युवाओं के लिए विशेष काउंसलिंग कार्यक्रम और जागरूकता अभियान शुरू करने की भी घोषणा की है।
Jammu and Kashmir Police और प्रशासन भी लगातार लोगों को ऑनलाइन ठगी, ड्रग्स और अपराध से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज और धार्मिक संस्थाएं मिलकर जागरूकता अभियान चलाएं तो युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से रोका जा सकता है।
घाटी में धार्मिक संगठनों की इस पहल को समाज के कई वर्गों ने सकारात्मक कदम बताया है। लोगों का कहना है कि युवाओं को सही मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिलेंगे तो वे समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।