लेह के मुख्य बाजार में आयोजित सांस्कृतिक संध्या उस समय यादगार बन गई, जब पद्मश्री पुरस्कार विजेता लोक कलाकार Morup Namgyal ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बुद्ध पूर्णिमा और पर्यटन सीजन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पर्यटक और कला प्रेमी शामिल हुए। पारंपरिक लद्दाखी संगीत और लोक संस्कृति से सजी इस शाम ने पूरे वातावरण को उत्साह और रंगों से भर दिया।
मोरुप नामग्याल ने अपने प्रसिद्ध लोक गीतों और पारंपरिक धुनों के माध्यम से लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। जैसे ही उन्होंने मंच संभाला, दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। उनकी मधुर आवाज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों ने लोगों को भावुक भी किया और रोमांचित भी। कई पर्यटक इस प्रस्तुति को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए।
कार्यक्रम में स्थानीय युवा कलाकारों ने भी लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिससे आयोजन और अधिक आकर्षक बन गया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने लाना और युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ना है। प्रशासन और पर्यटन विभाग ने भी इस आयोजन को पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
लेह मेन मार्केट में आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि इसने लद्दाख की लोक कला, संगीत और परंपराओं की खूबसूरती को भी उजागर किया। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने कलाकारों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और मोरुप नामग्याल की प्रस्तुति की जमकर सराहना की।