हाल ही में Sonam Wangchuk की रिहाई के बाद उन्होंने एक बड़ा और भावनात्मक बयान दिया है, जिसने लद्दाख की राजनीति और जनभावनाओं को फिर से चर्चा में ला दिया है। रिहाई के बाद मीडिया से बात करते हुए वांगचुक ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि लद्दाख के लोगों के अधिकारों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए है।
उन्होंने कहा कि लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना बेहद जरूरी है, ताकि यहां की भूमि, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा की जा सके। वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार लद्दाख के लोगों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है, जबकि यहां के लोग लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं।
अपने बयान में उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे इस आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि लद्दाख के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सभी को एकजुट होना होगा। वांगचुक ने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अनियंत्रित विकास गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
रिहाई के बाद उनके समर्थन में कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने स्वागत किया और उनके आंदोलन को और मजबूती देने की बात कही। इस बीच, सरकार की ओर से अभी तक उनके बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर हलचल तेज हो गई है।
कुल मिलाकर, सोनम वांगचुक का यह बयान साफ संकेत देता है कि लद्दाख में स्वायत्तता और अधिकारों की मांग अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि आने वाले समय में यह आंदोलन और तेज हो सकता है।