पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर Sonam Wangchuk से जुड़ा मामला अब Supreme Court of India तक पहुंच गया है, जिससे लद्दाख के मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला मुख्य रूप से लद्दाख को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और वहां के पर्यावरण व स्थानीय अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के नाजुक पर्यावरण, सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। उनका कहना है कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद वहां की जमीन, संसाधनों और रोजगार पर बाहरी दबाव बढ़ गया है, जिससे स्थानीय आबादी को खतरा महसूस हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने पहले भी शांतिपूर्ण विरोध और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाए थे।
अब इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है, जहां याचिका में मांग की गई है कि सरकार लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष संरक्षण दे। इससे वहां की जनजातीय आबादी को अपने संसाधनों और प्रशासन पर अधिक नियंत्रण मिल सकेगा। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
इस केस के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से यह स्पष्ट हो गया है कि लद्दाख के मुद्दे अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के बन चुके हैं। आने वाले समय में कोर्ट का फैसला न केवल लद्दाख बल्कि देश के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
कुल मिलाकर, सोनम वांगचुक का यह संघर्ष अब एक बड़े संवैधानिक और पर्यावरणीय मुद्दे का रूप ले चुका है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।